लोहड़ी : क्या है ये लोहड़ी का त्यौहार , और क्यों , कब और किसकी याद में इसे मनाया जाता है , जानिए रोचक तथ्य

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lohdi festival in hindi
क्यों मनाई जाती है लोहड़ी? जानिए, इससे जुड़ी मान्यताएं

दोस्तों आज हम बात करने वाले है लोहड़ी त्यौहार के बारे में। इस त्यौहार के बारे में जितने रोचक तथ्य है उतने ही आस्था और पवित्रता के साथ इसे मनाया भी जाता है।
आमतौर पे ये त्यौहार हरियाणा , पंजाब और हिमाचल प्रदेश में काफी धूमधाम से मनाया जाता है। लोहड़ी के त्यौहार के बारे में वहाँ लोगो की अलग अलग धार्मिक और पौराणिक कथाये सम्लित है।

विधि :
इस त्यौहार को मनाए की एक विधि है , इस त्यौहार में शाम के समय सभी इक्कठे होकर एक जगह लकडिया इक्कठी करके उसमे आग जलाते है।
फिर हर घर से पूरा परिवार समाज के लोगो के साथ वह एकत्रित होते है , जिनमे बच्चे , बूढ़े, औरते , युवतिया, लड़के और युवाये सम्लित होते है वो भी नाहा धोकर और नए कपडे पहन कर।

युवक और युवतिया फिर आग में चावल, मक्का, तिल और रेवड़िया आग में डालते है और हाथ जोड़ कर अपने मन में अपनी इछाओ को जाहिर करते है।

कुछ जगहों पे ये भी प्रथा है किस इस त्यौहार को एक सुबह लग्न भी माना जाता है और इस दिन एक लड़की को अपने शादी और जीवन साथी को चुनने के लिए ख़ास छूट होती है। वो अपने पसंद के लड़के का चुनाव कर सकती है समाज के सामने।
इस दिन औरत को एक विशेष अधिकार मिलता है। इस दिन नारी जाती का सम्मान और गौरव का सामान किया जाता है , उसकी सवतंत्रा का प्रदर्शन होता है की वो अपना जीवन साथ का चुनाव कर सकती है। अगर लड़की जिस लड़के को देख के आग में धान डाले और अगर वो लड़का भी उठ कर उस आग में धान डाले तो समझो दोनों जीवन साथी बनने के लिए रजामंद है। और अगर लड़का आके वह रखे गन्ने में से एक गन्ने तोड़ दे तो समझो वो खुश नहीं है इस शादी से।
तो वो जोड़ा शादी नहीं कर सकता। अगर कोई और लड़का उठ कर उस आग में धान दाल दे और वो लड़की उसके साथ भी धान दाल दे तो वो आपस में शादी कर सकते है , लेकिन अगर लड़की उस समय किसी गन्ने को तोड़ दे तो इसका मतलब वो लड़की उस लड़के को जीवन साथी नहीं बनाना चाहती।

इस के अलावा भी कुछ और भी पौराणिक कथाये है इस त्यौहार के बारे में :
जैसे की इस इस दिन किसानो की नयी फसल की कटाई होती है और घर में नया अनाज आता है , और किसान इसकी दिन को अपना और अपने परिवार के लिए नया साल मानता है। और इसकी ख़ुशी में परिवार और समाज के सभी लोग मिलकर अपनी ख़ुशी को जाहिर करते है। और इस पल को उन्होंने लोहड़ी का नाम दे दिया।

कुछ मान्यताये ये भी है की , संत कबीर की पत्नी का नाम लोही था और उन्ही के नाम पे वह के लोग इसे लोही भी कहते है और समय के साथ साथ इस नाम में कुछ परिवर्तन हो गए और लोही से लोहड़ी नाम बन गया।

कुछ मान्यताये ये भी है की , मुग़ल समय में , आमिर लोग खूबसूरत और जवान लड़कियों को गुलाम बनाते थे और खरीदते थे , ताकि वो आमिर लोगो की सेवा के लिए बेच कर उनकाअच्छा मुनाफा कमा सके , तब उस समय दूल्हा भट्टी ने मुग़ल सत्ताओ से और मुगलो से नबहूत साडी लड़कियों को आजाद करवाया और फिर उन्होंने इस दिन , समाज के सामने उन लड़कियों का विवाह करवाया ताकि वो एक इज्जत और सकून भरी जिन्दगी जी सके। ताकि समाज उनको तृस्कृत न करे , उनका अपमान न करे। और आज तक इस दिन को लोहड़ी के रूप में देखा जाता है।
कुछ लोगो की ये भी मान्यताये है की , होलिका की बहन का नाम लोहड़ी था जो पुराणों में वर्णित है , और उनका उत्तरी भारत के इन कबीलो के साथ अच्छे सम्बन्ध थे तो उनकी याद में लोहड़ी मनाया जाता है।

तो दोस्तों ये थी लोहड़ी के बारे में कुछ रोचक तथ्य जो मैं आपके सामने लाया हूँ , अगर आपको ये लोहड़ी की रोचक जानकारिया अच्छी लगी हो तो आप हमे नीचे कमेंट करके बता सकते है।


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