Kajari Teej: जानिए क्यों मनाई जाती है कजरी तीज और क्या है इसकी पूजन विधि ?

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नई दिल्ली: Kajari Teej: साल भर में महिलाएँ अपने पति के लिए कई व्रत रखती हैं। इनमें से एक व्रत है कजरी तीज। विवाहित महिलाएँ इस दिन अपने पति के लिए ‘निर्जला’ व्रत रखती हैं। इस त्योहार का आयोजन भाद्र मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को होता है।

भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि इस वर्ष बुधवार, 25 अगस्त को पड़ रही है। कजरी तीज को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे बूढ़ी तीज, कजली तीज और सतूरी तीज। इस दिन महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

Kajari Teej: जानिए क्या है पूजन विधि?

महिलाएँ कजरी तीज के दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव और देवी गौरी की मिट्टी या गोबर की मूर्ति बनाती हैं।

हालांकि, बाज़ार से शिव और गौरी की मूर्तियाँ भी खरीदी जा सकती हैं। आपको बता दें कि इस व्रत की पूजन विधि क्या है? सबसे पहले, मूर्तियों को लाल रंग के कपड़े से ढककर पूजा वेदी पर रखें। पूजा के दौरान माँ गौरी को 16 चीजें भेंट करें। भगवान शिव को बेल के पत्ते, गाय का दूध, गंगा जल, धतूरा, भांग और अन्य प्रसाद चढ़ाएँ। इसके बाद, शिव और गौरी की कथा सुनें। फिर धूप-दीप जलाकर आरती करें। शाम को चाँद देखने के बाद व्रत का पालन करें।

Kajri Teej
Kajri Teej

Kajari Teej: जानिए क्या है पूजन सामग्री?

आपको बता दें कि कजरी तीज के दिन विवाहित महिलाएँ 16 श्रृंगार करती हैं और देवी पार्वती को प्रसाद चढ़ाती हैं। प्रसाद के रूप में महिलाएँ देवी पार्वती को मेंहदी, हल्दी, शहद, बिंदी, कंगन, बालियाँ, हार, अँगूठी, चूड़ियाँ, लाल कपड़ा, गजरा, माँग टीका, नथ, कमरबंद, बिछुआ, पायल, अगरबत्ती, सिंदूर, काजल, कुमकुम, सत्तू, फल मिठाई, रोली, मौली, अक्षत, इत्यादि चढ़ाती हैं।

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