प्रशासन की मिलीभगत से खुलेआम चल रहा है ‘Farm house’ के नाम पर अवैध ‘Ware house’ का खेल!

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नई दिल्ली: फॉर्महाउस जैसी खुली जगहें भी अगर प्रदूषण की चपेट में हैं तो हालत कितनी भयावह है ये समझा जा सकता है । जो फॉर्म हाउस अपनी हरियाली और शांत माहौल के लिए जाने जाते हैं, उनकी जगह ट्रकों के काला धुएं और मशीनों के शोर ने ले ली है। हम बात कर रहे हैं दिल्ली के घिटोरनी इलाके की जहां बड़ी संख्या में फॉर्म हाउसेज का अलॉटमेंट हुआ था और करोड़ों रूपये की लागत लगाकर लोगों ने फार्म हाउस सिर्फ इस उम्मीद से ख़रीदा था कि वो एक प्रदूषण मुक्त,साफ़ सुथरे माहौल में रह सकें जहां सड़क,पानी बिजली की सही व्यवस्था हो और आसपास का अच्छा माहौल मिल सके। लेकिन उनकी ये उम्मीदें धरी की धरी रह गईं क्योंकि इलाके में कुछ लोग फॉर्महाउस के नाम पर जमीन लेकर उसका इस्तेमाल अवैध रूप से वेयरहाउस चलाने में कर रहे हैं जिसके चलते पूरे दिन यहां ट्रकों की आवाजाही जारी है। जिससे पूरा इलाका दिन भर न केवल काले धुएं की धुंध से घिरा रहता है। बल्कि इलाके की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं जिससे आस पास के स्थानीय लोगों की जिंदगी बदतर होती जा रही है।

फॉर्म हाउस के नाम पर अवैध वेयरहाउस का खेल!

घिटोरनी इलाके में सिल्वर ओक फार्म की मेन रोड समेत फार्म हाउस नंबर 42,44,49 में धड़ल्ले से अवैध वेयरहाउस चल रहे हैं। जो न केवल नियमों के खिलाफ हैं बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी खतरा बन रहे हैं लेकिन हैरानी ये है कि सब कुछ बेखौफ खुलेआम चल रहा है और प्रशासन अनजान बने होने का नाटक कर रहा है। जबकि वेयरहाउस के चलते लोगों की जिंदगी मुहाल हो गई है। वेयरहाउस होने की वजह से 24 घंटे इस पूरे इलाके में ट्रकों और दूसरे भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है जिससे शोर और धुएं का गुबार इलाके की फिजा बिगाड़ रहा है। वहीं वाहनों ने इलाके की सड़कों को इस कदर खस्ताहाल कर दिया है कि स्थानीय लोग समझ ही नहीं पा रहे कि सड़कों में गड्ढे हैं गड्ढे में सड़क इलाके में प्रदूषण का स्तर ऐसा हो गया है कि घिटोरनी गांव और फार्म हाउस में रहने वाले दूसरे लोग इन अवैध वेयरहाउस के चलते सुबह शाम की सैर के लिए स्लिवर ओक फार्म की तरफ घूमने भी नहीं जा पा रहे हैं।

अवैध वेयरहाउस ने बिगाड़ी घिटोरनी की आबोहवा

ये हाल तब है जबकि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर जा पहुंचा है और सरकार लगातार प्रदूषण रोकने के दावे कर रही है लेकिन कम से कम घिटोरनी इलाके में ये कोशिश कामयाब होती नजर नहीं आ रही क्योंकि यहां तो प्रशासन की मिलीभगत से ही अवैध वेयरहाउस चल रहे हैं जबकि लोगों ने इस जमीन का आवंटन फॉर्महाउस के लिए कराया था । साउथ वेस्ट एमसीडी के तहत आने वाले घिटोरनी इलाके में स्लिवर ओक फार्म बना है जिसमें सैकड़ों की तादात में फॉर्म हाउस बने हैं लेकिन नियमों को ताक पर रखकर कुछ फार्म हाउस संचालकों ने रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी में वेयर हाउस बना कर इसका कॉमर्शियल इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें सुबह-शाम कूड़ा जलाया जा रहा है। जिससे पूरे इलाके में प्रदूषण अपने चरम पर है और ग्रामीणों के साथ साथ दूसरे फॉर्म हाउसेज में रहने वाले लोगों का भी जीना दुश्वार हो गया है। कई बार स्थानीय पुलिस और एमसीडी को शिकायत भी की जा चुकी है लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है वहीं प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।

आवंटन फॉर्म हाउस का लेकिन चल रहा वेयरहाउस

स्थानीय लोगों के मुताबिक फार्म्स हाउस में वेयर हाउस के कारण सड़कों पर सुबह शाम ट्रकों के कारण जाम की स्थिति रहती है लोग इस बात की शिकायत प्रशानन से भी कर चुके हैं लेकिन कोई भी कार्यवाही नहीं की गयी है। साउथ एमसीडी में तैनात डिप्टी कमिशनर निधि श्रीवास्तवसे जब हमने इस मामले में बात करने की कोशिश की कि आखिर क्या वजह है कि खुलेआम अवैध कारोबार के फलने फूलने दिया जा रहा तो उन्होंने मीटिंग का बहाना बनाकर बात करने से ही इनकार कर दिया ।

स्थानीय लोगों का जीना हुआ दूभर

साफ है कि फॉर्महाउस के नाम पर वेयर हाउस का ये अवैध कारोबार बिना स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत के नहीं चल सकता है । ऐसे में सवाल ये है कि आखिर क्यों और कब तक ये गोरखधंधा स्थानीय लोगों की जान की आफत बना रहेगा। साथ ही उन लोगों का क्या जिन्होने चैन की जिंदगी के लिए करोड़ों रुपय़ों में इन फॉर्महाउस में अपना आशियाना बना रखा है।


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